Caracas में धमाके, Washington की मिसाइलें और Delhi की चिंता! एक युद्ध, कई कीमतें

सैफी हुसैन
सैफी हुसैन, ट्रेड एनालिस्ट

दुनिया के नक्शे पर एक और war zone उभरता दिख रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य हमला कर दिया है। राजधानी Caracas एक के बाद एक कम से कम सात भीषण धमाकों से गूंज उठी।
स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रात के अंधेरे में शहर थर्रा गया—आसमान में आग, सड़कों पर सन्नाटा और सत्ता के गलियारों में खलबली।

Warning पहले ही मिल चुकी थी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump काफी समय से संकेत दे रहे थे कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolas Maduro को अमेरिका एक illegal ruler मानता है।

पहले आर्थिक प्रतिबंध। फिर तेल सप्लाई पर प्रहार और अब direct military एक्शन साफ शब्दों में कहें तो—यह हमला अचानक नहीं, बल्कि scripted escalation का अगला अध्याय है।

India के लिए खतरे की घंटी क्यों?

इस युद्ध की सबसे तेज गूंज भारत तक सुनाई दे रही है। भारत वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में crude oil आयात करता है। Reliance Jamnagar Refinery खास तौर पर Venezuela के heavy crude के लिए डिजाइन की गई। युद्ध लंबा चला तो भारत को रोज़ाना 6 लाख बैरल तेल की कमी झेलनी पड़ सकती है।

इसका सीधा असर?
Petrol-Diesel महंगे, Inflation का दबाव, आम आदमी की जेब पर missile strike

अरबों का व्यापार दांव पर

तेल के अलावा भारत और वेनेजुएला के बीच—

  • Life-saving medicines
  • Vaccines
  • Aluminium और Scrap Iron का बड़ा व्यापार है

2024 में भारत ने $36.20 million aluminium $43.4 million scrap iron वेनेजुएला से आयात किया था। युद्ध ने इन सप्लाई चेन को भी freeze कर दिया है—जिसका असर construction और automobile sector पर पड़ेगा।

India की चुप्पी: मजबूरी या रणनीति?

ONGC Videsh के $600 million वेनेजुएला में फंसे हुए हैं। निवेश डूबने के कगार पर है, लेकिन इसके बावजूद भारत खुलकर कुछ नहीं कह रहा।
Experts का मानना है भारत और अमेरिका के बीच एक major trade deal बातचीत में है। वेनेजुएला के समर्थन में बयान देने से यह डील खतरे में पड़ सकती है

यही वजह है कि भारत फिलहाल “Wait and Watch Diplomacy” पर चल रहा है।
सटायर यही है—

जब बम गिरते हैं, तब बयान नहीं, बैलेंस शीट बोली जाती है।

Caracas जल रहा है। तेल बाजार कांप रहा है। और भारत गणित कर रहा है—राजनीति का नहीं, पेट्रोल का यह युद्ध सिर्फ दो देशों के बीच नहीं, बल्कि global economy बनाम global power की लड़ाई है।

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